7 चौंकाने वाले कारण जिनकी वजह से भारत और चीन दुनिया की 35% आबादी रखते हैं
क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के 8 अरब लोगों में से लगभग एक-तिहाई सिर्फ भारत और चीन में क्यों रहते हैं? ये सिर्फ संयोग नहीं है। यह इतिहास, भूगोल, संस्कृति और सामाजिक कारणों का परिणाम है।
आइए जानते हैं इन 7 मुख्य कारणों के बारे में:
1. ऐतिहासिक कारण
जनसंख्या वृद्धि अचानक नहीं होती, यह सदियों में बनती है। भारत और चीन की प्राचीन सभ्यताएँ हजारों साल पुरानी हैं।
- चीन: येलो और यांग्त्ज़े नदियों की घाटियाँ कृषि के लिए आदर्श थीं।
- भारत: सिंधु और गंगा घाटी ने उपजाऊ भूमि और सिंचाई की सुविधा दी।
इतिहास में स्थिरता ने लंबे समय तक जनसंख्या वृद्धि को संभव बनाया।
2. भूगोल और कृषि का लाभ
दोनों देशों के पास विशाल उपजाऊ क्षेत्र हैं। नदियाँ, मानसून और अनुकूल मौसम ने:
- लगातार फसल उत्पादन
- भोजन भंडारण और व्यापार की सुविधा
- बड़े परिवारों को पालन-पोषण
कृषि का विकास सीधे-सीधे जनसंख्या बढ़ाने में मदद करता है।
3. सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ
भारत और चीन में पारंपरिक रूप से बड़े परिवारों को बढ़ावा मिला:
- कृषि आधारित समाज में बच्चों को खेतों में सहायक माना जाता था।
- वंश और उत्तराधिकार को महत्व देने वाले रीति-रिवाजों के कारण ज्यादा बच्चे पैदा होते थे।
आज भी ये सामाजिक परंपराएँ अप्रत्यक्ष रूप से जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करती हैं।

4. सरकारी नीतियाँ और जनसंख्या नियंत्रण
- चीन ने 1979–2015 में “वन-चाइल्ड पॉलिसी” लागू की, जिसने वृद्धि धीमी की, लेकिन तब तक जनसंख्या बहुत बड़ी हो चुकी थी।
- भारत ने परिवार नियोजन कार्यक्रम बाद में शुरू किए, लेकिन जनसंख्या वृद्धि की गति अभी भी तेज है।
इतिहासिक जनसंख्या गति (population momentum) की वजह से बड़े युवा वर्ग के कारण वृद्धि बनी रहती है।
5. शहरीकरण और प्रवासन
शहरीकरण आमतौर पर छोटे परिवार को बढ़ावा देता है, लेकिन भारत और चीन में पहले से बड़े ग्रामीण जनसंख्या आधार मौजूद था।
आंतरिक प्रवासन ने घने जनसंख्या केंद्रों का निर्माण किया, जिससे आबादी लगातार बढ़ती रही।
6. क्यों सिर्फ ये दो देश?
अन्य देशों में ये सभी कारक एक साथ नहीं मिले:
- बड़े पैमाने पर कृषि योग्य भूमि
- प्राचीन सभ्यताएँ
- बड़े परिवारों को स्वीकारने वाली संस्कृति
- सदियों तक राजनीतिक स्थिरता
यूरोप, अफ्रीका या अमेरिका में कठिन जलवायु, युद्ध, रोग या कम कुशल कृषि के कारण इतनी बड़ी आबादी नहीं बढ़ सकी।
7. वैश्विक प्रभाव
भारत और चीन की विशाल आबादी का अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और राजनीति पर बड़ा असर है:
- विशाल कार्यबल से आर्थिक शक्ति बढ़ती है।
- संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
- वैश्विक निर्णयों में इन देशों की आबादी को प्राथमिकता दी जाती है।
निष्कर्ष
भारत और चीन मिलकर दुनिया की 35% आबादी का हिस्सा रखते हैं। यह प्राचीन इतिहास, उपजाऊ भूगोल, सांस्कृतिक परंपराएँ और जनसंख्या गति का परिणाम है।
इन देशों की जनसंख्या वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और उनके भविष्य में जनसंख्या परिवर्तन का असर पूरी दुनिया पर होगा।
भारत और चीन मिलकर दुनिया की 35% आबादी पर कब्जा रखते हैं। इसके पीछे कारण हैं उपजाऊ भूमि, प्राचीन इतिहास, सांस्कृतिक परंपराएँ और जनसंख्या गति।
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क्यों सिर्फ ये दो देश?
अन्य देशों में ये सभी कारक एक साथ नहीं मिले: बड़े पैमाने पर कृषि योग्य भूमि, प्राचीन सभ्यताएँ, बड़े परिवारों को स्वीकारने वाली संस्कृति, और सदियों तक राजनीतिक स्थिरता। यूरोप, अफ्रीका या अमेरिका में कठिन जलवायु, युद्ध, रोग या कम कुशल कृषि के कारण इतनी बड़ी आबादी नहीं बढ़ सकी।
इसलिए भारत और चीन मिलकर दुनिया की 35% आबादी रखते हैं। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं है; यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, राजनीति और संसाधनों पर गहरा प्रभाव डालता है।
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